Monday, November 24, 2025
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हिमाचल में बढ़ रही किडनी की बीमारी, बीमारी का दिया नाम ‘खामोश महामारी’

Himachal Pradesh : हिमाचल प्रदेश में क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसे ‘खामोश महामारी’ का नाम दिया जा रहा है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) द्वारा किए गए एक अध्ययन ने इस बीमारी के बढ़ते खतरे को उजागर किया है ।

Himachal Pradesh ‘खामोश महामारी’ के नाम से बढ़ रही किडनी की बीमारी

हिमाचल प्रदेश में क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसे ‘खामोश महामारी’ का नाम दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की ओर से किए गए एक अध्ययन में इस बीमारी के बढ़ते खतरे को उजागर किया गया है। यह अध्ययन प्रदेश के बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में उपचार करवाने आए मरीजों पर आधारित है। चौंकाने वाली बात यह है कि शिमला जिला सीकेडी का प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। अध्ययन में शामिल कुल मरीजों में से लगभग 39.9 प्रतिशत मरीज अकेले शिमला जिले से है। इसके बाद मंडी में 14.5 प्रतिशत, सोलन में 10 प्रतिशत और कुल्लू में 8.6 प्रतिशत मरीज पाए गए। वहीं, लाहौल-स्पीति जिले में सबसे कम 0.6 प्रतिशत मरीज मिले, जिसके पीछे कम आबादी और अलग भौगोलिक परिस्थितियों को कारण बताया गया है।

उधर, डॉक्टरों की मानें तो शूगर, ब्लड प्रेशर, यूरिन में प्रोटीन लीक होना आदि कारणों से सीकेडी के मामले बढ़ रहे हैं। एचपीयू के अंतर विषय अध्ययन विभाग के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी रणधीर सिंह रांटा के नेतृत्व में आंचल शर्मा और सुनंदा संघेल ने कुल 2,609 मरीजों पर यह अध्ययन किया है। उनके अनुसार, अध्ययन के दौरान 2014 से 2023 तक क्रॉनिक किडनी डिजीज के मरीजों का विश्लेषण किया गया। सीकेडी मरीजों की संख्या बढ़ने के प्रमुख कारण शुद्ध पेयजल की कमी, संतुलित और समय पर खानपान न होना, दिनचर्या का सही न होना, धूम्रपान, शराब, मानसिक तनाव, रक्तचाप आदि पाए गए हैं। इसके अलावा पानी को शुद्ध करने के लिए निश्चित मात्रा से अधिक क्लोरीन का डालना भी एक कारण हो सकता है।

60.2 फीसदी पुरुष और 39.8 प्रतिशत महिलाएं चपेट में

लिंग के आधार पर विश्लेषण करने पर पाया गया कि सीकेडी की चपेट में आए पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है। कुल मरीजों में से 60.2 प्रतिशत पुरुष और 39.8 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रसित थीं। आयु वर्ग के हिसाब से देखा जाए तो 57 से 67 वर्ष और 68 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में अधिकांश मामले पाए गए। 17 वर्ष से कम आयु वाले मरीज अपेक्षाकृत कम थे। 57 से 67 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में बीमारी का सबसे अधिक प्रसार देखा गया,खासकर 2023 में यह ज्यादा रहा।

शुगर, ब्लड प्रेशर और यूरिन में प्रोटीन का लीक होना मुख्य कारण

डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है कि सीकेडी के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं – शुगर (मधुमेह), ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और यूरिन में प्रोटीन का लीक होना। आईजीएमसी शिमला में नेफ्रोलॉजी विभाग की चिकित्सक डॉ. कामाक्षी सिंह ने बताया कि ये तीनों ही सीकेडी के मुख्य कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा, गुर्दे की छननी का खराब होना और गुर्दे के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली बीमारियाँ भी इस गंभीर समस्या को बढ़ावा दे रही हैं।

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डॉ. कामाक्षी सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर किडनी में पथरी हो तो उसका समय रहते उपचार करवाना अत्यंत आवश्यक है। उपचार न करने पर गुर्दे खराब हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार पानी में ऐसे तत्व होते हैं जो किडनी को खराब कर सकते हैं। इन सभी कारणों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि हमें अपनी जीवनशैली में सुधार करने की तत्काल आवश्यकता है। नियमित जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, धूम्रपान और शराब से परहेज, और तनाव प्रबंधन क्रोनिक किडनी डिजीज से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हिमाचल में इस खामोश महामारी को रोकने के लिए जन जागरूकता और सरकारी स्तर पर ठोस कदम उठाना समय की मांग है।

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